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मोदी सरकार के इस फैसले को महिलाओं का समर्थन, उत्तराखंड में बीजेपी ही नहीं विरोधी दल भी कर रहे सराहना


महिला आरक्षण बिल (फोटो- ETV Bharat)

देहरादून: महिलाओं को राजनीति में सम्मानजनक हिस्सेदारी देने के लिए मोदी सरकार 2023 में लाए गए कानून को संशोधित करने जा रही है. खास बात ये है कि देशभर की तरह उत्तराखंड में भी महिलाओं की नजर अब आगामी संसद के विशेष सत्र पर है, जहां महिला आरक्षण को लेकर नए संशोधित कानून के आने की उम्मीद है.

देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. केंद्र सरकार महिला आरक्षण कानून को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी में है. चर्चा है कि आगामी संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े कानून में संशोधन लाया जा सकता है.

ताकि, संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की दिशा में प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके. इस संभावित कदम को लेकर न केवल सत्तारूढ़ दल बल्कि, विपक्षी दलों से जुड़ी महिला नेताओं की भी सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आ रही है.

तीन दिवसीय संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी: दरअसल, केंद्र सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को तीन दिवसीय संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है. राजनीतिक हलकों में इस बात की चर्चा है कि इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण से जुड़े संशोधित अधिनियम को लाया जा सकता है.

अगर ऐसा होता है तो यह महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी के लिहाज से एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम माना जाएगा. देशभर की तरह उत्तराखंड की महिला नेताओं की भी नजर अब इस विशेष सत्र पर टिकी हुई है. जिस पर तमाम दलों की महिलाओं ने इस कदम को स्वागत योग्य बताया है.

केंद्र सरकार ने महिलाओं को राजनीति में सम्मानजनक हिस्सेदारी देने के लिए जिस तरह से प्रयास किए हैं, वो सराहनीय हैं. संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का निर्णय महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम होगा.“- दीप्ति रावत भारद्वाज, प्रदेश महामंत्री, बीजेपी

महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी यह पहल: दीप्ति रावत भारद्वाज का मानना है कि लंबे समय से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने की मांग की जाती रही है, लेकिन इसे व्यवहारिक रूप देने के लिए ठोस कदम बहुत कम उठाए गए. ऐसे में केंद्र सरकार की यह पहल महिलाओं के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकती है.

Dipti Rawat

बीजेपी प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत भारद्वाज का बयान (फोटो- ETV Bharat GFX)

क्या बोलीं पूर्व मेयर अनीता ममगईं? महिला आरक्षण को लेकर बीजेपी से जुड़ी अन्य महिला नेताओं में भी उत्साह देखा जा रहा है. ऋषिकेश की पूर्व मेयर अनीता ममगाईं का कहना है कि यह कानून महिलाओं के लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं होगा. उनका मानना है कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से लोकतंत्र और अधिक मजबूत होगा.

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ऋषिकेश के पूर्व मेयर अनीता ममगाईं का बयान (फोटो- ETV Bharat GFX)

विपक्षी महिला नेताओं ने भी पहल का किया स्वागत: दिलचस्प बात ये है कि महिला आरक्षण को लेकर केवल बीजेपी की महिला नेता ही उत्साहित नहीं हैं, बल्कि विपक्षी दलों से जुड़ी महिला नेताओं ने भी इस पहल का स्वागत किया है. उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला का कहना है कि महिलाओं को राजनीति में आगे बढ़ाने के लिए इस तरह के कदम बेहद जरूरी हैं.

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उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला का बयान (फोटो- ETV Bharat GFX)

मजबूती से उठाया जा सकेगा महिलाओं से जुड़े मुद्दे: ज्योति रौतेला ने ये भी कहा कि राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण में महिलाओं से जुड़े मुद्दों को ज्यादा मजबूती से उठाया जा सकेगा. शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक समानता जैसे विषयों पर महिला प्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है.

बता दें कि महिला आरक्षण को लेकर देश में लंबे समय से बहस होती रही है. केंद्र सरकार ने साल 2023 में महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए कानून पारित किया था. हालांकि, उस कानून को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होना जरूरी बताया गया था. प्रधानमंत्री पहले ही ये संकेत दे चुके हैं कि यह आरक्षण व्यवस्था साल 2029 तक लागू हो सकती है.

राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को मिलेगी नई दिशा: अब चर्चा है कि आगामी विशेष सत्र में इस कानून में संशोधन करके इसकी प्रक्रिया को और स्पष्ट किया जा सकता है. संभव है कि इसमें वर्तमान जनसंख्या और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को शामिल करते हुए इसे लागू करने का रोडमैप तय किया जाए.

यदि ऐसा होता है तो ये भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को एक नई दिशा देने वाला कदम साबित हो सकता है. फिलहाल, पूरे देश के साथ-साथ उत्तराखंड की महिला नेताओं की नजर संसद के इस विशेष सत्र पर टिकी हुई है, जहां महिला आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है.

उत्तराखंड में बढ़ेंगी विधानसभा सीटें: भारत सरकार विशेष सत्र के जरिए महिला आरक्षण विधेयक को अंतिम रूप दे सकती है. दरअसल, इसमें परिसीमन प्रक्रिया को अपनाया जाना है, परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया जाता है. लिहाजा, राज्यों में मौजूद जनसंख्या के आधार पर सीटों को तय किया जाएगा.

फिलहाल, जनसंख्या 2011 की जनगणना के आधार पर मानी जानी है, इसके पीछे की वजह ये है कि हर 10 साल में होने वाली जनगणना साल 2021 में नहीं हो पाई थी, ऐसे में परिसीमन का आधार जनगणना 2011 को ही रखा जाएगा. इसके आधार पर उत्तराखंड में विधानसभा की सीटें 105 तक बढ़ने की उम्मीद है. जबकि, फिलहाल राज्य में 70 विधानसभा सीटें हैं.

उत्तराखंड परिसीमन को लेकर क्षेत्रफल के आधार पर निर्णय की बात कहता रहा है, कुछ राज्यों में यह व्यवस्था लागू भी है. उत्तराखंड में उठ रही है मांग पर्वतीय सीमांत क्षेत्र से बढ़ रहे पलायन की वजह से हो रही है, पिछली बार परिसीमन के दौरान करीब 6 सीटें पहाड़ों से कम हो गई थी, ऐसे में इस बार फिर परिसीमन हुआ तो पर्वतीय क्षेत्रों से और भी ज्यादा सीटें कम होने की पूरी संभावना है.

फिलहाल, यहां बात महिला आरक्षण की है. ऐसे में आकलन ये है कि 105 सीटों में करीब 34 से 35 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती है. उत्तराखंड में महिलाओं के लिए विधानसभा में जाने का यह बड़ा मौका होगा और इस तरह बड़ी संख्या में महिलाएं विधानसभा तक पहुंच सकेंगी. मौजूदा स्थिति को देखें तो अभी उत्तराखंड में 8 महिला विधायक ही जीतकर पहुंची हैं.

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