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देहरादून में ऑपरेशन प्रहार: रिटायर्ड ब्रिगेडियर जोशी हत्याकांड के बाद उत्तराखंड पुलिस की सख्ती, क्या बदलेगी कानून व्यवस्था?


बिगड़ती लॉ एंड ऑर्डर सिचुएशन पर उत्तराखंड पुलिस का ऑपरेशन ‘प्रहार’ (PHOTO- ETV Bharat)

देहरादून: राजधानी देहरादून में रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की हत्या ने पूरे उत्तराखंड को गहरे सदमे और कानून व्यवस्था पर सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया है. यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात भर नहीं, बल्कि इसने राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिस शहर को अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता रहा, वहीं इस तरह की घटना ने आम लोगों के मन में असुरक्षा की भावना को कई गुना बढ़ा दिया है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय से राजधानी में चोरी, लूट, हत्या और झगड़े जैसी घटनाओं में लगातार इजाफा हुआ है. लेकिन इस हत्याकांड ने हालात की गंभीरता को कई अधिक बढ़ा दिया है. अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक अनजाने में हुई घटना है, या फिर यह उस बिगड़ती व्यवस्था का संकेत है, जिसे लंबे समय से या तो नजरअंदाज किया जा रहा था या फिर इसको सुधारने के बारे में किसी ने सोचा ही नहीं.

Uttarakhand POLICE Operation Prahar

रिटायर्ड ब्रिगेडियर जोशी हत्याकांड के गिरफ्तार आरोपी (PHOTO-ETV Bharat)

राजनीतिक घमासान ने बढ़ाया दबाव: रिटायर्ड ब्रिगेडियर मुकेश जोशी की हत्या की घटना के बाद राजनीतिक माहौल का सियासी पारा भी बढ़ गया है. विपक्ष खासकर कांग्रेस, सरकार पर लगातार हमले कर रही है और कानून-व्यवस्था को पूरी तरह विफल करार दे रही है. विपक्ष के नेता गणेश गोदियाल से लेकर राहुल गांधी इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दे चुके हैं. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब राजधानी में ही इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तो बाकी प्रदेश में स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है.

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कल्लू गैंग का इनामी बदमाश राजा साहनी गिरफ्तार. (PHOTO-ETV Bharat)

वैसे यह भी बात सही है कि सरकार के लिए यह सिर्फ एक कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि साख से जुड़ा मुद्दा बन गया है. जनता के बीच बढ़ते असंतोष और विपक्ष के हमलों के बीच सरकार पर यह दबाव साफ नजर आ रहा है. शायद यही कारण है कि खुद सीएम धामी ने इस मामले में अधिकारिओं को दिशानिर्देश दिए हैं.

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देहरादून में एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल खुद सड़कों पर उतरकर मोर्चा संभाल रहे हैं. (PHOTO-ETV Bharat)

सीएम धामी का सख्त और स्पष्ट संदेश: इस पूरे घटनाक्रम के बीच सीएम पुष्कर सिंह धामी ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने पुलिस विभाग के सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अपराध और अपराधियों पर तत्काल प्रभाव से नियंत्रण स्थापित किया जाए. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.

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विकासनगर में चेकिंग अभियान चलाती पुलिस (PHOTO-ETV Bharat)

यह बयान महज एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है. मुख्यमंत्री का यह रुख इस बात को दर्शाता है कि सरकार अब इस मुद्दे पर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है और हर हाल में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना चाहती है. इसके लिए सीएम धामी की पहल के बाद राज्य में ‘ऑपरेशन प्रहार’ शुरू किया गया है.

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देहरादून में देर रात चेकिंग अभियान चलाते हुए पुलिस. (PHOTO-ETV Bharat)

जमीन पर दिखा असर, एसएसपी खुद संभालते नजर आए मोर्चा: मुख्यमंत्री के निर्देशों का असर तुरंत देखने को मिलता दिखाई दे रहा है. मंगलवार देर रात देहरादून एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल खुद सड़कों पर उतर दिखाई दिए. उन्होंने न केवल विभिन्न इलाकों में चल रहे चेकिंग अभियानों की निगरानी की, बल्कि पुलिस टीमों को मौके पर ही दिशा-निर्देश भी दिए. रेलवे स्टेशन, मद्रासी कॉलोनी और त्यागी रोड जैसे इलाकों में एक साथ कई टीमों द्वारा सघन चेकिंग और छापेमारी की गई. इस दौरान पुलिस की मौजूदगी हर प्रमुख स्थान पर दिखाई दी.

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एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने देर रात शहर के बीच घंटाघर में पुलिस कर्मियों को ब्रीफ किया. (PHOTO-ETV Bharat)

छापेमारी में सफलता और चौंकाने वाले खुलासे: इस अभियान के दौरान पुलिस को मद्रासी कॉलोनी में छापेमारी के दौरान एक अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया, जिसके कब्जे से 57 अवैध देसी शराब के क्वार्टर और लगभग दो लाख रुपए नकद बरामद किए गए. जब उससे इस रकम के बारे में पूछताछ गया तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया. इसके बाद पुलिस ने न केवल आरोपी को गिरफ्तार किया बल्कि बरामद नकदी को भी जब्त कर लिया. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पहले भी कई बार अवैध शराब तस्करी के मामलों में जेल जा चुका है.

पूछताछ में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि आरोपी की पत्नी का भी आपराधिक इतिहास रहा है. दोनों के खिलाफ अवैध शराब तस्करी के कई मामले दर्ज हैं और उन पर गुंडा एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है. यह बात इस बात की ओर इशारा करता है कि अपराध अब केवल व्यक्तिगत स्तर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है जिसमें परिवार तक शामिल हो रहे हैं.

कल्लू गैंग का इनामी बदमाश गिरफ्तार: उधर, एक अप्रैल को देहरादून पुलिस ने ऑपेरशन ‘प्रहार’ के तहत बिहार के कल्लू गैंग का 1 लाख का शातिर इनामी अपराधी को ऋषिकेश से गिरफ्तार किया. आरोपी 6 माह पहले ओडिशा के जिला कारागार कटक से जेल तोड़कर फरार हो गया था. ये पूरी कार्रवाई ऋषिकेश पहुंची ओडिशा पुलिस की सूचना पर की गई. ऋषिकेश और ओडिशा पुलिस ने फरार चल रहे राजा साहनी पुत्र महेश साहनी को ढालवाला के पास सुमन पार्क के पास वाहन चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया.

छोटी लापरवाही पर भी सख्ती: पुलिस ने इस अभियान के दौरान यह स्पष्ट कर दिया कि अब छोटी-छोटी लापरवाहियों को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा. 31 मार्च की रात शराब पीकर वाहन चलाने वाले शहर में 14 लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके वाहनों को सीज कर दिया गया. इसके अलावा रात के समय बिना किसी ठोस कारण के घूम रहे 21 संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लेकर थाने लाया गया और उनसे पूछताछ की गई. एसएसपी प्रमेंद्र डोभाल की मानें तो इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य केवल तत्काल अपराध रोकना ही नहीं बल्कि लोगों के मन में कानून का डर पैदा करना है, ताकि वे भविष्य में इस तरह की गतिविधियों से दूर रहें.

ऑपरेशन प्रहार का फैसला क्यों: रिटायर्डर ब्रिगेडियर जोशी हत्याकांड के बाद सरकार ने ‘ऑपरेशन प्रहार’ के तहत एक व्यापक रणनीति तैयार की है. डीजीपी दीपम सेठ की अध्यक्षता में पुलिस मुख्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए गए. इस बैठक में आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, आईजी लॉ एंड ऑर्डर नीलेश आनंद भरणे और एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. जहां सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई.

बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करें और किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. एसएसपी को यह जिम्मेदारी दी गई कि वे अधीनस्थ अधिकारियों की जवाबदेही तय करें और उनकी कार्यप्रणाली पर नजर रखें. थाना और चौकी स्तर पर पुलिस की उपस्थिति बढ़ाने, हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने और लगातार चेकिंग अभियान चलाने पर जोर दिया गया. यह पहली बार है जब इतनी स्पष्टता के साथ जवाबदेही तय की गई है, जिससे यह उम्मीद की जा रही है कि इसका सकारात्मक असर देखने को मिलेगा.

पीजी, किरायेदार और पब्स पर सख्त नजर: सरकार ने यह भी समझा है कि अपराध केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अन्य जगह से भी पनप रहा है. इसी को ध्यान में रखते हुए पीजी (पेइंग गेस्ट), किरायेदारों और होम-स्टे में रहने वाले लोगों का सघन सत्यापन करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही तय समय के बाद चलने वाले बार और पब्स पर भी सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है. यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार असत्यापित लोगों और देर रात की गतिविधियों के कारण अपराध की घटनाएं सामने आती हैं. ऐसे में इन क्षेत्रों पर नियंत्रण कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है.

पढ़ाई की आड़ में हुड़दंग नई चुनौती: अमूमन घटना में ये बात भी सामने आई है कि अपराध में लिप्त देहरादून के कई छात्र भी है. कुछ छात्र पढ़ाई की आड़ में पीजी और हॉस्टलों में रहकर हुड़दंग और अन्य संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं. इस पर सख्ती दिखाते हुए पुलिस ने संस्थान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने यहां रहने वाले सभी छात्रों का पूरा रिकॉर्ड रखें और समय-समय पर उनका सत्यापन कराएं. साथ ही रात 10 बजे के बाद आवाजाही को नियंत्रित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, यानि छात्रों के लिए भी एक एसओपी तैयार करके उसे लागू किया गया है.

वहीं, पुलिस के इस अभियान के बीच कांग्रेस ने राजधानी की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर सरकार को आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत ने इस घटना को लेकर सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि देहरादून में लगातार हो रही इस प्रकार की घटनाएं शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने की मांग की ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो.

वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता सुजाता पॉल ने भी इस मामले में कई गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने प्रशासन से सवाल किया कि सुरक्षा व्यवस्थाओं के नाम पर अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई है और उन पब और क्लबों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए जो देर रात तक संचालित होते हैं और जहां इस तरह की घटनाएं जन्म लेती हैं. इसके साथ ही कांग्रेस नेताओं ने पूर्व सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.

सीएम का भरोसा और सख्त चेतावनी: उधर, 1 अप्रैल को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिवंगत रिटायर्ड ब्रिगेडियर जोशी के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस घटना में शामिल दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा.

बहरहाल सीएम ने जिस तरह से अपने अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए हैं, उसके बाद तो यही लगता है कि राज्य में कानून व्यवत्शा और मजबूत होगी. लेकिन फिर भी सवाल यही है कि क्या इस सख्ती का असर लंबे समय तक देखने को मिलेगा? या यह सिर्फ कुछ दिनों का अभियान बनकर रह जाएगा.

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