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उत्तराखंड में महंगा हुआ पानी! आज से लागू हुई नई दरें, ये है पूरा गणित


उत्तराखंड में महंगा हुआ पानी! (ETV Bharat)

देहरादून: उत्तराखंड में जल संस्थान ने एक अप्रैल से पेयजल की नई दरें लागू कर दी हैं. पेयजल की नई दरें हर साल की तरह इस बार भी 2013 के बेस टैरिफ पर आधारित हैं. इस बार 9% और 11% की वृद्धि की है. यह पिछले साल के रेट से मात्र 4 से 5 फीसदी की बढ़ोत्तरी है. उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके गुप्ता ने कहा यह मामूली वृद्धि है.

अब कितना महंगा होगा पानी, ये है गणित: उत्तराखंड में पेयजल की नई दरें अभी उत्तराखंड जल संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक नहीं हुई हैं. विभागीय जानकारी के अनुसार इसका सिंपल फार्मूला है. यह फार्मूला 2013 में आए उत्तराखंड जल संस्थान के बेस टैरिफ पर लागू होता है. उत्तराखंड जल संस्थान के बेस टैरिफ को लोअर क्लास यानी नगर निगम भवन मूल्यांकन 0 से लेकर 3500 तक के परिवारों के लिए के लिए 9% और उस से ऊपर के भवन मूल्यांकन वाले मिडिल क्लास और हायर क्लास के लिए 11% बढ़ाया गया है.

उत्तराखंड में महंगा हुआ पानी! (ETV Bharat)

उदाहरण के तौर पर पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के लिए नगर निगम असेसमेंट के अनुसार भवन मूल्यांकन 0 से 360 भवन मूल्यांकन के लिए पिछले साल यानी वित्तीय वर्ष 2025-26 में सर्फेस वाटर चार्ज 192.60, ग्राउंड वाटर चार्ज 203.30 और पंपिंग योजना में 218.28 प्रतिमाह था. अब ये कैटगिरी लोअर क्लास की है तो इसमें 9% की वृद्धि बेस टेरिफ पर होगी. यानी 2013 में इस केटेगिरी में सर्फेस वाटर चार्ज 90₹ था. इसका 9% होगा. इस तरह से अप्रैल से अब ये चार्ज होगा 200.70₹ होगा. इसी तरह से ग्राउंड वाटर चार्ज अब इस कैटेगिरी में 211.85 और पंपिंग वाटर हो 227.46₹ हो जाएगा. ये पिछले साल के रेट में 4-5% की बढ़ोतरी है.

पेयजल के नए रेट पब्लिक के लिए सुखद, संस्थान के लिए भार: उत्तराखंड जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक डीके गुप्ता ने कहा उत्तराखंड सरकार ने ही पेयजल के लिए 2013 में टैरिफ लागू किया गया था. तब से लेकर अब तक नया टैरिफ नहीं आया है. उन्होंने कहा नए टैरिफ के न आने तक पब्लिक के लिए यह फ़ायदेमंद है. हर साल 3 से 5 फ़ीसदी की यह मामूली वृद्धि जनता के हित में है. उन्होंने कहा इसका अतिरिक्त भार जल संस्थान को उठाना पड़ता है.

उन्होंने कहा संस्थान के लिए यह चुनौती है. कर्मचारी का वेतन बढ़ता जा रहा है. जिसका दबाव संस्थान पर रहता है. इसके प्रबंधन को लेकर लगातार संस्थान सामने चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि कम टैरिफ के चलते संस्थान को नुकसान होता है. उसकी भरपाई सरकार को करनी पड़ती है. यह सरकार के ऊपर ही एक अतिरिक्त भार है.

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