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जनगणना में लगे अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय, नियम तोड़ने पर जेल, जुर्माने का भी प्रावधान


उत्तराखंड में जनगणना (ETV Bharat)

देहरादून: जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की प्रक्रिया कई राज्यों में शुरू हो गई है. वहीं, उत्तराखंड राज्य में मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना की प्रक्रिया 10 अप्रैल से स्वगणना के साथ शुरू होने जा रही है. उससे पहले ही भारत के महापंजीयक की ओर से उत्तराखंड राज्य समेत देशभर के सभी राज्यों में मौजूद जनगणना निदेशालयों को जनगणना अधिनियम 1948 को लेकर सर्कुलर जारी कर दिया है. जिसमें जनगणना के दौरान जनता की भागीदारी के साथ ही जनगणना कार्य में लगने वाले अधिकारियों कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय की गई है.

दरअसल, देश भर के अधिकांश राज्यों में जनगणना दो चरणों में होने हैं. वहीं, उत्तराखंड राज्य में जनगणना 2027 तीन चरणों में संपन्न कराए जाएंगे. जनगणना के पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई 2026 के बीच मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना का कार्य किया जाना है. उससे पहले 10 अप्रैल से 24 अप्रैल के बीच मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना के तहत स्वगणना की सुविधा उपलब्ध रहेगी. जिस संबंध में उत्तराखंड शासन की ओर से अधिसूचना भी जारी की जा चुकी है. इसके बाद जनगणना के दूसरे चरण के तहत उत्तराखंड के हिम आच्छादित क्षेत्रों में 1 सितंबर से 30 सितंबर 2026 के बीच लोगों की गणना की जाएगी. इसके बाद जनगणना के तीसरे चरण के तहत प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में देश भर के साथ ही लोगों की गणना 9 फरवरी से 28 फरवरी 2027 के बीच की जाएगी.

जनगणना का कार्य शांतिपूर्ण और बेहतर ढंग से संपन्न हो इसको देखते हुए भारत के महापंजीयक की ओर से सर्कुलर भी जारी कर दिया गया है. जिसमें जनगणना कार्यों में लगे अधिकारियों कर्मचारियों के दायित्वों के साथ ही आम जनता की भागीदारी सुनिश्चित हो इस पर विशेष जोर दिया गया है. जनगणना कार्यों में लगे अधिकारी एवं कर्मचारी अपने कर्तव्यों का निर्वहन सहित ढंग से करें. जनता भी जनगणना कार्य में अपना पूरा सहयोग दें. इसके लिए जवाबदेही तय की गई है.

जारी सर्कुलर के अनुसार यदि कोई व्यक्ति धारा 7क (जनगणना के लिए परिसरों वाहनों का अधिग्रहण करने) या धारा 7ग ( जानकारी अभिप्राप्त करने की शक्ति) के अधीन किए गए किसी आदेशों का उल्लंघन करेगा तो उसे पर एक साल तक का कारावास या जुर्माना या फिर दोनों दंड लगाया जा सकते हैं.

इसके साथ ही जनगणना का कोई अधिकारी या फिर जनगणना करने में सहयोग देने के लिए चयनित व्यक्ति अगर अधिनियम का उल्लंघन करता है, अपने कर्तव्यों का पालन करने से इनकार करता है, कोई अधिकारी या कर्मचारी झूठी जानकारी तैयार करता है, किसी अन्य कर्मचारियों को काम करने से रोकता है, केंद्र सरकार या फिर राज्य सरकार की मंजूरी के बिना कोई जानकारी सार्वजनिक करता है, दस्तावेज ऑन को इधर-उधर करता है या उसे छुपाता है, कोई भी जनगणना अधिकारी जो जानबूझकर कोई अपमानजनक या अनुचित प्रश्न पूछता है या जानबूझकर कोई गलत विवरण देता है या, केंद्रीय सरकार या राज्य सरकार की पूर्व स्वीकृति के बिना, किसी भी जानकारी को प्रकट करता है जिसे उसने जनगणना विवरण के जरिए या उसके उद्देश्यों के लिए प्राप्त किया है.

इसके अलावा, कोई भी छंटाई करने वाला, संकलक या जनगणना स्टाफ का अन्य सदस्य जो किसी जनगणना दस्तावेज़ को हटाता है, छिपाता है, नुकसान पहुंचाता है या नष्ट करता है या किसी जनगणना दस्तावेज़ के साथ ऐसे तरीके से व्यवहार करता है जो जनगणना परिणामों के सारणीकरण को गलत या विफल करने की संभावना रखता है, या कोई स्थानीय प्राधिकरण जो धारा 4A के तहत दिए गए आदेश का पालन करने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का भी प्रावधान किया गया है. जिसमें कारावास और जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके साथ ही अगर दोष सिद्ध होती है तो फिर 3 साल तक की करवा हो सकती हैं.

इसी तरह आम जनता के लिए भी जनगणना अधिनियम में प्रावधान किया गया है. जिसके तहत, अगर कोई व्यक्ति जनगणना कर्मचारियों की ओर से पूछे गए वैध सवाल का गलत जवाब या फिर जवाब देने से इनकार करता है. जनगणना कर्मचारियों को घर में प्रवेश देने से इनकार करता है. जनगणना के लिए घर के बाहर लिखे गए अंक या चिन्हों को हटाता है या परिवर्तित करता है, गलत जानकारी देना, जनगणना कार्यालय में बिना परमिशन प्रवेश करता है तो 1000 रूपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

किसी भी व्यक्ति को जनगणना अधिकारी द्वारा अपनी ड्यूटी के लिए बनाई गई किसी पुस्तक, रजिस्टर या रिकॉर्ड का निरीक्षण करने का अधिकार नहीं होगा, या धारा 10 के तहत दी गई किसी अनुसूची का निरीक्षण करने का अधिकार नहीं होगा. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 (भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023) में इसके विपरीत कुछ भी होने के बावजूद, किसी भी ऐसी पुस्तक, रजिस्टर, रिकॉर्ड या अनुसूची में कोई भी प्रविष्टि किसी भी नागरिक कार्यवाहियं में या किसी भी आपराधिक कार्यवाही में, इस अधिनियम के तहत अभियोजन या इस अधिनियम के तहत किसी अपराध का गठन करने वाले किसी कार्य या चूक के लिए लागू नहीं की जा सकेगी.

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