एसडीएम ने नशा मुक्ति केंद्र में मारा छापा (Photo-ETV Bharat)
चमोली: सीमांत जिला मुख्यालय चमोली के थराली विकासखंड के ग्वालदम में उस समय हड़कंप मच गया, जब थराली के उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट ने एक नशा मुक्ति केंद्र पर अचानक छापा मार दिया. औचक निरीक्षण के दौरान नशा मुक्ति केंद्र में भारी अनियमितताएं सामने आईं. जांच में पाया गया कि नशा मुक्ति केंद्र बिना वैध दस्तावेजों के संचालित किया जा रहा था. मौके पर न तो कोई डॉक्टर मौजूद मिला और न ही प्रशिक्षित, जिसके बाद उपजिलाधिकारी ने सख्त एक्शन लेने की बात कही.
उपजिलाधिकारी पंकज भट्ट की अध्यक्षता में गठित टीम, जिसमें चिकित्सा विभाग व समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों ने ग्वालदम में संचालित एक नशा मुक्ति केंद्र का निरीक्षण किया. जांच में सामने आया कि केंद्र दिसंबर 2025 तक संचालित होने का दावा कर रहा था, लेकिन जांच के दौरान किसी भी प्रकार के वैध कागजात प्रस्तुत नहीं किए जा सके. केंद्र में 15 कर्मचारियों का रजिस्ट्रेशन दिखाया गया, मगर डॉक्टर, नर्स और योग प्रशिक्षकों की कोई प्रमाणित डिग्री नहीं मिली.
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एक डॉक्टर की डिग्री आंध्र प्रदेश से रजिस्टर्ड पाई गई, जिसे कथित तौर पर एडिट कर दर्शाया गया था. इसके अलावा संबंधित व्यक्ति द्वारा बिना लाइसेंस के मेडिकल स्टोर भी संचालित किया जा रहा था. उसके पास केवल डी-फार्मा का डिप्लोमा था, जबकि मेडिकल स्टोर संचालन हेतु आवश्यक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया था और दवाओं का कोई स्टॉक रजिस्टर भी नहीं मिला. निरीक्षण में ओपीडी कक्ष की स्थिति भी बेहद खराब पाई गई, आवश्यक उपकरण जैसे ब्लड प्रेशर मापने की मशीन (स्पिग्नोमैनोमीटर) और वजन मशीन खराब हालत में मिले, वहीं अधिकांश दवाएं एक्सपायर हो चुकी थी, केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद पड़े थे.
प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि औचक निरीक्षण के दौरान नशा मुक्ति केंद्र में भारी अनियमितताएं सामने आईं हैं. जांच में पाया गया कि नशा मुक्ति केंद्र बिना वैध दस्तावेजों के संचालित किया जा रहा था. जिसके बाद मामले में सख्त एक्शन लेने की बात कही जा रही है.
उप जिलाधिकारी थराली पंकज भट्ट ने बताया कि एक समिति द्वारा संचालित नशा मुक्ति केंद्र में वर्ष 2025 के बाद किसी भी रोगी का पंजीकरण नहीं किया गया था. निरीक्षण के दौरान केंद्र में न तो कोई डॉक्टर मौजूद मिला और न ही कोई स्टाफ मौके पर मिला. डॉक्टर की डिग्री भी संदिग्ध पाई गई, जो आंध्र प्रदेश की बताई जा रही थी, लेकिन उसमें छेड़छाड़ के संकेत मिले हैं. प्रारंभिक जांच में डिग्री के फर्जी होने की आशंका जताई जा रही है. एसडीएम ने बताया कि केंद्र में एक डॉक्टर कक्ष मिला, लेकिन उसमें रखे सभी चिकित्सकीय उपकरण और दवाइयां एक्सपायरी पाई गईं, जो गंभीर लापरवाही को दर्शाता है. उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द ही संबंधित नशा मुक्ति केंद्र और इसके संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की बात कही.
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