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उत्तराखंड में मई-जून महीने में शुरू हो सकता है SIR, 1 अप्रैल से होगा मैपिंग का सघन अभियान


उत्तराखंड में एसआईआर (फोटो- ETV Bharat GFX)

देहरादून: उत्तराखंड में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम के तहत प्री-एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है. पिछले साल दिसंबर महीने में शुरू हुई प्री-एसआईआर प्रक्रिया के तहत 27 मार्च 2026 तक प्रदेश भर में 85.50 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.

ऐसे में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से मतदाताओं की शत प्रतिशत मैपिंग किए जाने को लेकर 1 अप्रैल से प्री-एसआईआर में मैपिंग का सघन अभियान शुरू होने जा रहा है. ताकि, प्रदेश के पिछड़े हुए जिलों में भी मैपिंग फीसदी को बढ़ाया जा सके. वहीं, संभावना जताई जा रही है कि उत्तराखंड में आगामी मई- जून महीने में एसआईआर का कार्यक्रम शुरू हो सकती है.

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे से खास बातचीत (वीडियो- ETV Bharat)

शत प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग पर जोर: मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय शत प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग करने पर जोर दे रहा है. ऐसे में भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा को देखते हुए ‘बुक ए कॉल विद बीएलओ’ सुविधा भी शुरू की है. जिसके तहत मतदाता एक क्लिप पर अपने बीएलओ के साथ कॉल बुक करा सकते हैं.

इसके लिए मतदाताओं को वेबसाइट https://voters.eci.gov.in पर विजिट करके या फिर ECI-NET मोबाइल ऐप को डाउनलोड कर अपनी कॉल बुक करा सकते हैं. मतदाताओं की ओर से कॉल बुक करने के दो दिन के भीतर ही संबंधित बीएलओ की ओर से उस मतदाता से संपर्क किया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य यही है कि आगामी एसआईआर शुरू होने से पहले ही प्री-एसआईआर के दौरान सभी मतदाताओं की मैपिंग की जा सके.

बीएलओ आउटरीच अभियान के तहत मैपिंग की स्थिति-

  • उत्तराखंड में मौजूद कुल 81,84,092 मतदाताओं में से 69,97,131 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 85.50 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • बागेश्वर जिले में मौजूद कुल 2,15,389 मतदाताओं में से 2,12,727 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 98.76 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • अल्मोड़ा जिले में मौजूद कुल 5,30,784 मतदाताओं में से 4,96,479 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 93.54 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • चंपावत जिले में मौजूद कुल 2,06,890 मतदाताओं में से 1,92,558 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 93.07 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • उत्तरकाशी जिले में मौजूद कुल 2,44,113 मतदाताओं में से 2,25,873 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 92.53 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • रुद्रप्रयाग जिले में मौजूद कुल 1,91,655 मतदाताओं में से 1,77,029 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 92.37 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • पिथौरागढ़ जिले में मौजूद कुल 3,70,709 मतदाताओं में से 3,38,212 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 91.23 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • टिहरी गढ़वाल जिले में मौजूद कुल 5,10,578 मतदाताओं में से 4,64,062 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 90.89 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • चमोली जिले में मौजूद कुल 2,99,169 मतदाताओं में से 2,70,171 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 90.31 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • नैनीताल जिले में मौजूद कुल 7,86,246 मतदाताओं में से 6,98,335 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 88.82 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • पौड़ी गढ़वाल जिले में मौजूद कुल 5,65,090 मतदाताओं में से 4,99,984 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 88.48 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • हरिद्वार जिले में मौजूद कुल 14,08,051 मतदाताओं में से 12,38,761 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 87.98 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • उधम सिंह नगर जिले में मौजूद कुल 13,72,707 मतदाताओं में से 10,69,644 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 77.92 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.
  • देहरादून जिले में मौजूद कुल 14,82,711 मतदाताओं में से 11,13,296 मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. यानी 75.09 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है.

उत्तराखंड में आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण को देखते हुए प्री-एसआईआर चरण में करीब 85 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है. ऐसे में एक अप्रैल से प्रदेश में और भी सघन डोर-टू-डोर अभियान चलाकर कम मैपिंग वाले बूथ पर स्पेशल फोकस करते हुए मैपिंग का काम पूरा किया जाएगा.

भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के क्रम में मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से हर बूथ पर एब्सेंट, शिफ्टेड और डेथ (ASD) सूची तैयार की जा रही है. ताकि, मतदाता सूची के शुद्धिकरण काम बेहतर तरीके से किया जा सके. वर्तमान समय में प्रदेश की सभी 11,733 पोलिंग बूथों के सापेक्ष सभी राजनीतिक दलों की ओर से 19,116 बीएलए यानी बूथ लेवल एजेंट की ही नियुक्ति हो पाई है.

राजनीतिक दलों की ओर से अप्वॉइंट किए गए बीएलए की स्थिति-

  1. उत्तराखंड में मौजूद चार राजनीतिक पार्टियों की ओर से अभी तक 171 बीएलए- 1 और 19116 बीएलए- 2 नियुक्त किए गए हैं.
  2. बीजेपी की ओर से 70 बीएलए- 1 और 9276 बीएलए- 2 नियुक्त किए गए हैं.
  3. कांग्रेस की ओर से 69 बीएलए- 1 और 9506 बीएलए- 2 नियुक्त किए गए हैं.
  4. सीपीआई (एम) की ओर से 19 बीएलए- 1 और 217 बीएलए- 2 नियुक्त किए गए हैं.
  5. बीएसपी की ओर से 12 बीएलए- 1 और 117 बीएलए- 2 नियुक्त किए गए हैं.

क्या बोले अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी? वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत में अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे ने कहा कि उत्तराखंड में अभी एसआईआर की घोषणा नहीं हुई है. हालांकि, संभावना है कि मई या फिर जून महीने में एसआईआर की घोषणा हो सकती है. उसको देखते हुए राज्य में सभी तैयारियां की जा रही है.

SIR In Uttarakhand

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी विजय कुमार जोगदंडे (फोटो- ETV Bharat)

वर्तमान समय में प्रदेश में जो मतदाताओं के मैपिंग की फीसदी है, उसको बेहतर करने पर जोर दिया जा रहा है. अभी तक में 85.50 फीसदी मतदाताओं की मैपिंग की जा चुकी है, कुछ जिलों में मैपिंग की फीसदी काफी कम है. जिसके चलते संबंधित जिलों के बीएलओ को ज्यादा सक्रिय होकर काम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसके साथ ही राजनीतिक दलों से भी अनुरोध किया गया है कि वो बूथ लेवल पर शत प्रतिशत बीएलए नियुक्त करें, जो बीएलओ की मदद करेगा.

उत्तराखंड में तीन जिले देहरादून, उधम सिंह नगर और हरिद्वार ऐसे हैं. जिनकी मैपिंग फीसदी काफी कम है. जिसके सवाल पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि साल 2003 की मतदाता सूची का साल 2025 की मतदाता सूची से मिलान किया जा रहा है. हालांकि, साल 2003 में कुछ जिलों में जनसंख्या कम थी और मतदाताओं की संख्या भी कम थी, लेकिन साल 2025 में मतदाताओं की संख्या में काफी ज्यादा वृद्धि हुई है.

लिहाजा, मतदाताओं की बड़ी संख्या के आधार पर मैपिंग किया जा रहा है. यही वजह है कि इन तीनों जिलों में मतदाताओं की संख्या अधिक है। इसके अलावा, तमाम मतदाता शिक्षा, रोजगार समेत अन्य कारणों से भी प्रदेश में आए होंगे. जिसके चलते हर व्यक्ति से संपर्क करना बीएलओ के लिए संभव शायद नहीं हो पा रहा है.

ऐसे में अगर हर बूथ पर राजनीतिक पार्टियों की ओर से बीएलए की नियुक्ति कर दी जाती है, तो बीएलए के सहयोग से भी इस काम को किया जाएगा. ताकि, प्रदेश में मैपिंग फीसदी को बढ़ाया जा सके. यही वजह है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से लगातार सभी राजनीतिक पार्टियों से अनुरोध किया जा रहा है कि वो सभी बूथों पर बीएलए नियुक्त करें.

साथ ही बताया कि निर्वाचक नामावली में जितने भी मतदाताओं का नाम दर्ज है, उनका मैपिंग करना अनिवार्य है. जब तक की एसआईआर की घोषणा नहीं हो जाती है. ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि प्री-एसआईआर के तहत चल रहे मैपिंग प्रक्रिया में ज्यादा से ज्यादा लोग प्रतिभाग करेंगे.

राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त किए जाने वाले बीएलए आखिर क्यों महत्वपूर्ण होते हैं? इसके सवाल पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि बीएलए यानी बूथ लेवल एजेंट वो होता है, जो बीएलओ को निर्वाचक नामावली तैयार करने के लिए आपत्ती, दावों की सुनवाई में सहयोग करता है.

अगर शुरू में ही राजनीतिक पार्टियों की ओर से बीएलए नामित कर दिए जाते हैं, तो बीएलओ को बीएलए से घर-घर सत्यापन अभियान, फॉर्म जमा करने और सही व्यक्ति की पहचान करने में सहयोग मिलता है. यही वजह है कि बीएलए काफी महत्वपूर्ण माने जाते है.

एसआईआर के मद्देनजर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से सभी बूथों पर आईटी वॉलिंटियर्स नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है, जो एसआईआर के दौरान बीएलओ का तकनीकी सहयोग करेंगे. जिसके सवाल पर अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि बूथ लेवल ऑफिसर जो होता है, वो शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकत्री या फिर अन्य कर्मचारी होते हैं.

जिनको डेढ़ से 2 लाख मतदाताओं की जानकारी हासिल करने में वॉलिंटियर्स की जरूरत होती है. यही वजह है कि मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, बीएलओ की मदद के लिए वॉलिंटियर्स की ड्यूटी लगाने पर विचार किया जा रहा है. हालांकि, कुछ जिलों की ओर से वॉलिंटियर्स की ड्यूटी लगा दी है.

ऐसे में जब एसआईआर की प्रक्रिया शुरू होगी, उस दौरान आईटी वॉलिंटियर्स की मदद से डिजिटेशन का कार्य संपन्न किया जाएगा. साथ ही बताया कि जहां-जहां आईटी वॉलिंटियर्स की जरूरत होगी, वहां पर जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से आईटी वॉलिंटियर्स की ड्यूटी लगाई जाएगी.

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