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राज्य कर मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का सचिवालय कूच, कहा बिना सड़क पर उतरे नहीं सुनती सरकार


पुलिस ने सचिवालय नहीं जाने दिया तो सड़क पर धरना (Photo- ETV Bharat)

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में सोमवार को अपनी लंबित दो सूत्रीय मांगों को लेकर मिनिस्ट्रियल कर्मियों ने संयुक्त परिषद के समर्थन में सचिवालय कूच किया. हालांकि पुलिस ने कर्मियों को सुभाष रोड स्थित सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया. इसके बाद अपनी मांगों को लेकर राज्य कर मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों के नए प्रस्तावित ढांचे को स्वीकृत कराए जाने और नियमावली प्रख्यापित किए जाने की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया.

मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों ने किया सचिवालय कूच: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष अरुण पांडे ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड में अब यह परिपाटी बन गई है कि जब तक कोई भी संगठन सड़क पर उतर कर आंदोलन नहीं करेगा, तब तक उनकी कोई भी सुनवाई नहीं होने वाली है. उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है. उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि मुख्यमंत्री को स्वयं बेरोजगार संघ और उपनल कर्मियों के आंदोलन में सड़क पर उतरने के लिए बाध्य होना पड़ा. पांडे ने कहा कि यह बड़ी विडंबना है कि मांगों को लेकर पूर्व में भी शासन व सरकार को ज्ञापन प्रेषित किए जाते थे और वार्ता के माध्यम से समस्याओं को सुना जाता था. लेकिन राज्य में अब यह परंपरा समाप्त हो गई है.

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राज्य कर मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का सचिवालय कूच (Photo- ETV Bharat)

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने दिया मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का साथ: उनका कहना है कि पिछले तीन माह से कर विभाग के कर्मचारी अपनी दो मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं. हालांकि इन कर्मियों के आंदोलन के प्रभाव से अधिकारियों के प्रस्तावित ढांचे का तीन बार पुनर्गठन हो गया, मगर यह कर्मचारी अब भी इससे वंचित हैं. अरुण पांडे ने कहा कि ढांचा और नियमावली बनाने का काम अधिकारियों का नहीं बल्कि सरकार का होता है, लेकिन सरकार उनकी मांगों को अनसुना कर रही है. आज सड़कों पर उतरा वही विभाग है, जो कर वसूल करके राजस्व इकट्ठा करता है. लेकिन बार-बार प्रयास करने के बावजूद इनकी कोई सुनवाई नहीं हो पा रही है.

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मिनिस्ट्रियल कर्मचारी ढांचा बढ़ाने और राज्य कर अधिकारियों की संशोधित नियमावली शीघ्र लागू करने की मांग की (Photo- ETV Bharat)

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप: उन्होंने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि बीती 27 फरवरी को शासन स्तर पर हुई वार्ता में भी कर्मियों को एक हफ्ते के भीतर मांगों का निस्तारण किए जाने का आश्वासन दिया गया था. लेकिन अभी तक दो सूत्रीय मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है. उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनों को बढ़ावा शासन और सरकार की प्रणाली दे रही है. उन्होंने चेताया कि अगर कर विभाग के कार्मिकों की दो मांगें शीघ्र पूरी नहीं हुईं तो, राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद को इन दो मांगों को लेकर बड़ा आंदोलन करने के लिए विवश होना पड़ेगा.

उत्तराखंड कर मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन नेगी ने मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का ढांचा बढ़ाये जाने और राज्य कर अधिकारियों की संशोधित नियमावली शीघ्र लागू किए जाने की मांग उठाई है.

ये हैं मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों की दो मांगें

  1. मिनिस्ट्रियल कर्मचारियों का ढांचा बढ़ाने की मांग
  2. राज्य कर अधिकारियों की संशोधित नियमावली शीघ्र लागू किए जाने की मांग

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