नई दिल्ली/देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड में जगह-जगह अवैध मजारें बन रही हैं। इससे स्थानीय लोगों में खासा आक्रोश है। पिछले कई समय से इस पहाड़ी सूबे के डेमोग्राफी में बदलाव की बात भी कही जा रही है। अब स्थिति ऐसी है कि पहाड़ों में दूर जंगलों, घाटों और नदियों के आसपास भी आपको अवैध मजारें दिखने लग जाएंगी। ये अवैध मजारें रातों-रात बना दी जाती हैं और फिर उस जगह को कब्जा करने की कोशिश होती है। हालांकि प्रशासन ने ऐसी कई अवैध मजारों को खुद ढहाया है। लेकिन इसके बाद भी अवैध मजारों के बनने का यह क्रम नहीं रुका है।
लोगों ने पूछा- पानी की टंकी पर कौन मरा था जो बना दी मजार
ऐसी ही एक घटना मसूरी की है। यहां का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि मलेच्छों ने पानी की टंकी के ऊपर मजार बना दी थी। गुस्से में आकर लोगों ने इस मजार को हथौड़े से तोड़ दिया और पूछा कि ‘यहां कौन मरा’ था? इस मजार को ढहाने वाले लोगों का कहना है कि यह है मसूरी का विकास। ये क्या अजूबा है? यहां पानी की टंकी के ऊपर ही अवैध मजार बना दी। इसके साथ ही लोगों ने प्रशासन पर भी सवाल उठाए और पूछा कि पहाड़ के जंगलों से लकड़ी लेने पर महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई हो जाती है लेकिन इस तरह पानी की टंकी के ऊपर मजार बनाने वालों पर क्यों नहीं होती? बता दें कि यह वायरल वीडियो मार्च का है।
पहले बनती हैं अवैध मजारें फिर शुरू हो जाता है झाड़-फूंक का धंधा
सवाल यह है कि जब इस पानी के टंकी के नीचे कोई फकरी दफन नहीं है तो फिर ये कौन लोग हैं जिन्होंंने यहां मजार बनाई। ऐसी ही कई वीडियो वायरल हो रही हैं जिनमें मसूरी में जगह-जगह अवैध मजारों के बने होने की बात कही जा रही है। मसूरी को पहाड़ों की रानी कहा जाता है। अभी कुछ महीने पहले यहां बुल्ले शाह की अवैध मजार ने भी सुर्खियां बटोरी थी। हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने इस मजार में तोड़फोड़ की थी और सवाल पूछा था कि बूल्लेशाह जब पाकिस्तान में दफन है तो मसूरी में उसकी मजार कैसे बनी और क्यों बनी? इसके अलावा यह भी सवाल उठा था कि बुल्लेशाह जब खुदा को मानते ही नहीं थे तो उनकी मजार कैसे? पहाड़ों में पहले अवैध मजारें बनती हैं और फिर वहां नीली चादरें और अगरबत्ती जलाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसके बाद इन जगहों पर झाड़ फूंका का धंधा होने लगता है।

