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यमन के सना में इजराइल का हवाई हमला, हूती सरकार के प्रधानमंत्री की मौत


सना: यमन की राजधानी सना में इजराइल के हवाई हमले में विद्रोही संगठन हूती द्वारा नियंत्रित सरकार के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहवी की मौत हो गई. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इजराइली हमले में प्रधानमंत्री की मौत की पुष्टि की.

विद्रोही समूह के एक बयान में कहा गया है कि अहमद अल-रहवी गुरुवार को एक नियमित बैठक के दौरान हुए हमले में कई मंत्रियों के साथ मारे गए.

वहीं, इजराइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने यमन के सना क्षेत्र में हूती सरकार के एक सैन्य ठिकाने पर सटीक हमला किया.

अल-रहवी अगस्त 2024 से हूती नेतृत्व वाली सरकार के प्रधानमंत्री पद पर थे.

इस सप्ताह की शुरुआत में भी इजराइली सेना ने सना के लक्षित क्षेत्रों को निशाना बनाया था, जिसमें कम से कम 10 लोग मारे गए और 102 अन्य घायल हो गए. हूती संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकारी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की थी.

गाजा में इजराइल के हमलों के बाद से हूती विद्रोहियों ने इजराइल पर बार-बार मिसाइलें दागी हैं. हूती समूह का कहना है कि उसने फिलिस्तीनी नागरिकों के साथ एकजुटता दिखाने के लिए इजराइल के खिलाफ हमले किए हैं.

कौन थे अहमद अल-रहवी
अहमद गालिब नासिर अल-रहवी का जन्म दक्षिणी यमन के आबयन (Abyan) प्रांत में प्रभावशाली अल-रहवी जनजाति में हुआ था. उनके पिता गालिब नासिर अल-रहवी राजनीतिक हस्ती थे, जिनकी 1970 के दशक में हत्या कर दी गई थी. राजनीतिक परिवार से होने के कारण अहमद को सार्वजनिक सेवा में जाने का अवसर मिला. राष्ट्रीय स्तर पर फेमस होने से पहले अहमद अल-रहवी ने कई पदों पर कार्य किया. आबयन प्रांत के राज्यपाल रहे. 2019 में, अल-रहवी को सर्वोच्च राजनीतिक परिषद में नियुक्त किया गया, जो यमन के हूती-नियंत्रित क्षेत्रों में सर्वोच्च शासी निकाय है. उनकी पदोन्नति हूती समूह के भीतर बढ़ते विश्वास को दर्शाती है, जिसने 2014 में सना पर नियंत्रण करने के बाद से उत्तरी यमन में अपनी शक्ति को मजबूत किया है.

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास का वीजा रद्द
इस बीच, अमेरिका ने फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन और फिलिस्तीनी प्राधिकरण के 80 अधिकारियों के वीजा रद्द कर दिए हैं या जारी करने से इनकार कर दिया है. इनमें फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास भी शामिल हैं. इस प्रतिबंध के कारण अब्बास न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग नहीं ले पाएंगे, जहां एक अन्य कार्यक्रम में, कई देश फिलिस्तीनी देश को औपचारिक रूप से मान्यता देने वाले हैं.

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