प्रतीकात्मक फोटो (Photo-Getty Images)
देहरादून: पिछले लंबे समय से उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक की आयकर विभाग से जुड़ी टीम सर्वे के काम में जुटी हुई है. इस दौरान खास तौर पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्टांप कार्यालयों से रजिस्ट्रियों से जुड़े रिकॉर्ड्स भी लिए जा रहे हैं. इसी कड़ी में आयकर की इंटेलिजेंस और क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन विंग ने देहरादून में भी अपने सर्वे के काम को शुरू किया है.
आयकर की टीम सर्विस से जुड़े अपने इस काम के लिए आइजी स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय पहुंची. जहां से रजिस्ट्रियों से जुड़े तमाम रिकॉर्ड्स को जांचा गया. माना जा रहा है कि आयकर विभाग विभिन्न सूचनाओं के आधार पर जमीन खरीदारों द्वारा रजिस्ट्री के दौरान लगाए गए पैन कार्ड की डुप्लीकेसी का सर्वे कर रही है. ताकि ऐसी स्थिति में इनकम टैक्स चोरी करने की कोशिश करने वालों को पकड़ा जा सके. इस मामले में स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय से कुछ जानकारियां भी मांगी गई है जिसे आयकर विभाग को उपलब्ध करा दिया गया. इनकम टैक्स की टीम पिछले करीब 5 सालों के दौरान हुई रजिस्ट्री का सर्वे कर रही है.
वैसे तो स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन कार्यालय इससे जुड़ी जानकारियां नियम अनुसार आयकर विभाग को भेजता है, लेकिन टैक्स बचाने की मंशा के साथ गलत जानकारी देने वाले लोगों पर शिकंजा कसने के लिए आयकर विभाग सर्वे कर रहा है. हालांकि आयकर विभाग द्वारा इस तरह समय पर सर्वे करना सामान्य प्रक्रिया के रूप में भी रहा है. रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स चोरी की संभावनाएं अधिक रहती हैं, खासकर तब जब संपत्ति के वास्तविक मूल्य और रजिस्ट्री में दर्शाए गए मूल्य में अंतर होता है. इसके अलावा फर्जी दस्तावेजों के जरिए लेन-देन को छिपाने की कोशिश भी की जाती है. ऐसे में आयकर विभाग का यह सर्वे अभियान इन अनियमितताओं को उजागर करने में मददगार साबित हो सकता है.
इस सर्वे के आधार पर आगे चलकर संदिग्ध मामलों में नोटिस जारी किए जा सकते हैं. यदि जांच में किसी तरह की गड़बड़ी सामने आती है, तो संबंधित व्यक्तियों पर आयकर अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई भी संभव है. आयकर विभाग का यह सर्वे अभियान एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा जरूर है, लेकिन इसकी व्यापकता और गहनता यह संकेत देती है कि विभाग टैक्स चोरी के खिलाफ सख्त रुख अपनाने जा रहा है. आने वाले दिनों में इस कार्रवाई के और भी परिणाम सामने आ सकते हैं, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है.
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