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चारधाम यात्रा में कैसे जलेंगे चूल्हे? LPG क्राइसिस में क्या कारगर होंगे वैकल्पिक संसाधन, जानिए प्लानिंग


गैस सिलेंडर का विकल्प (फोटो- ETV Bharat)

देहरादून: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 से पहले सरकार ने एलपीजी, लकड़ी और अन्य ईंधन संसाधनों को लेकर व्यापक तैयारी शुरू कर दी है. मांग के आकलन से लेकर वैकल्पिक व्यवस्थाओं तक, हर स्तर पर प्लानिंग की जा रही है. ताकि, यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं और स्थानीय व्यावसायियों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

आगामी चारधाम यात्रा को लेकर उत्तराखंड सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है. यात्रा सीजन में संभावित एलपीजी संकट को देखते हुए सरकार ने पहले ही डिमांड और सप्लाई का आकलन शुरू कर दिया है. पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल के मुताबिक, शासन स्तर से उन्हें चारधाम यात्रा रूट और पर्यटन सीजन के दौरान गैस की मांग एवं आपूर्ति का विस्तृत आकलन करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके तहत होटल एसोसिएशन और यात्रा मार्ग से जुड़े जिलों के प्रशासन के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की गई.

एलपीजी संकट के बीच लकड़ी और वैकल्पिक संसाधनों पर जोर (वीडियो- ETV Bharat)

तीन जिलों में हर महीने 15-16 हजार LPG सिलेंडर की मांग का अनुमान: पर्यटन सचिव धीराज गर्ब्याल ने बताया कि इस बार चारधाम यात्रा अप्रैल के दूसरे हफ्ते से शुरू हो रही है. जबकि, पिछले साल यात्रा मई-जून में गति पकड़ पाई थी. ऐसे में इस बार पहले से ज्यादा दबाव रहने की संभावना है. उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग इन तीन प्रमुख जिलों में हर महीने 15 से 16 हजार व्यावसायिक LPG सिलेंडरों की मांग का अनुमान लगाया गया है.

Chardham FireWood

जलावन लकड़ी (फाइल फोटो- ETV Bharat)

पर्यटन सचिव गर्ब्याल ने आगे बताया कि पिछले साल के आंकड़ों को आधार बनाते हुए इस बार की मांग तय की गई है और इसे भारत सरकार को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. ताकि, समय रहते पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. वहीं, 7 जिलों में हर महीने 1.11 लाख अतिरिक्त सिलेंडरों की जरूरत है.

FireWood Use For Cooking

लकड़ी की चूल्हे पर बनाए जा रहे समोसे (फाइल फोटो- ETV Bharat)

चारधाम यात्रा का प्रभाव केवल तीन जिलों तक सीमित नहीं रहता. हरिद्वार, देहरादून, पौड़ी, टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी इन 7 जिलों में यात्रा सीजन के दौरान हर महीने करीब 1 लाख 11 हजार अतिरिक्त व्यावसायिक LPG सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है.

इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 3,500 अतिरिक्त सिलेंडरों की मांग सामने आती है. हालांकि, ऑयल कंपनियों का दावा है कि इस बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए उनके पास पर्याप्त स्टॉक और सप्लाई व्यवस्था मौजूद है.“- आनंद स्वरूप, आयुक्त खाद्य एवं आपूर्ति

एहतियात के तौर पर वैकल्पिक संसाधनों के इस्तेमाल की अपील: संभावित दबाव को देखते हुए पर्यटन विभाग ने होटल व्यावसायियों और यात्रा से जुड़े लोगों से संयम बरतने की अपील की है. सचिव धीराज गर्ब्याल ने कहा कि भले ही वर्तमान स्थिति सामान्य है, लेकिन एहतियात जरूरी है. उन्होंने LPG के विकल्प के तौर पर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग पर जोर दिया.

Uttarakhand Chardham Yatra

उत्तराखंड के चार धाम (फाइल फोटो- Information Department)

वन निगम के साथ समन्वय कर यात्रा मार्ग पर जलाऊ लकड़ी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं. यात्रा रूट पर पहले से मौजूद लकड़ी की टालों को मजबूत किया जा रहा है.“- धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन

जरूरत पड़ने पर नए स्थानों पर भी टाल स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है. इसके अलावा ऊर्जा विभाग से भी समन्वय किया गया है. ताकि, बिजली आपूर्ति निर्बाध बनी रहे और लोग इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर सकें.“- धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन

26 टालों पर 3,354 क्विंटल से ज्यादा जलाऊ लकड़ी का स्टॉक: LPG संकट की आशंका को देखते हुए वन विकास निगम ने भी अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित 26 टालों और फुटकर बिक्री केंद्रों पर 3,354 क्विंटल से ज्यादा जलाऊ लकड़ी का भंडारण किया गया है.

LPG Cylinder

गैस सिलेंडर (फाइल फोटो- ETV Bharat)

देहरादून के चंद्रबनी, सेलाकुई और रायवाला, उत्तरकाशी और नई टिहरी के कई केंद्रों के साथ-साथ चमोली एवं रुद्रप्रयाग के सोनप्रयागज्योतिर्मठ (जोशीमठ) जैसे प्रमुख पड़ावों पर लकड़ी की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है. इससे आपात स्थिति में होटल और ढाबा संचालकों को वैकल्पिक ईंधन मिल सकेगा.

पिछले यात्रा सीजन में आए 5 लाख वाहन, पेट्रोल-डीजल आपूर्ति को लेकर भी सरकार सतर्क: चारधाम यात्रा के दौरान हर साल लाखों की संख्या में वाहन उत्तराखंड पहुंचते हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की मांग भी तेजी से बढ़ जाती है. पिछले साल पूरी यात्रा सीजन में 5,14,016 वाहन उत्तराखंड आए थे, इसे देखते हुए भी राज्य सरकार ने ईंधन आपूर्ति को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है.

इस पूरे विषय पर मुख्य सचिव स्तर से लगातार निगरानी की जा रही है और हर दूसरे दिन समीक्षा बैठक हो रही है. खाद्य आपूर्ति विभाग भी ऑयल कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है और नोडल अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं.“- धीराज गर्ब्याल, सचिव पर्यटन

सरकार की अपील, घबराहट नहीं, धैर्य रखें: राज्य सरकार का कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में अक्सर लोग घबराहट में जरूरत से ज्यादा संसाधनों का उपयोग करने लगते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है. इसलिए सभी से अपील की गई है कि वे धैर्य बनाए रखें और संयम के साथ संसाधनों का इस्तेमाल करें.

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