श्रीनगर गढ़वाल: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत इन दिनों बीजेपी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. शनिवार 30 अगस्त को हरक सिंह रावत श्रीनगर गढ़वाल में थे, जहां उन्होंने बीजेपी सरकार पर गढ़वाल मंडल की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था तो वहीं श्रीनगर गढ़वाल से विधायक और स्वास्थ्य मंत्री धन सिंह रावत पर भी जमकर निशाना साधा.
श्रीनगर में पत्रकारों से बात करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा कि पौड़ी गढ़वाल और श्रीनगर की उपेक्षा लगातार बढ़ रही है. यदि यही स्थिति जारी रही तो जनता को बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. उन्होंने विशेष रूप से गढ़वाल कमिश्नरी की खराब स्थिति का उल्लेख किया.
हरक सिंह रावत ने कहा कि डीआईजी से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारी भी पौड़ी में बैठने को तैयार नहीं हैं. गढ़वाल कमिश्नर को मुख्यमंत्री का सचिव भी बना रखा है. इसीलिए वो पौड़ी में अपना समय ही नहीं देते पाते है. हरक सिंह रावत का आरोप है कि गढ़वाल की प्रशासनिक और विकासात्मक समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है.
इसके साथ ही उन्होंने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया. उन्होंने इसे एक सिर्फ चुनावी वादा और जनता को गुमराह करने का प्रयास करार दिया. भाजपा और आरएसएस की नीतियों पर हमला करते हुए रावत ने कहा कि सरकार जनता के मूलभूत मुद्दों की बजाय केवल चुनावी जीत और संगठन विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है.
उन्होंने यह भी कहा कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन जैसे गंभीर मुद्दों की अनदेखी की जा रही है, जबकि इन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है. आपदा पीड़ितों को मुआवजे के नाम पर धोखा देने का आरोप भी उन्होंने भाजपा पर लगाया.
प्रदेश की जर्जर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी रावत ने तीखे सवाल उठाए. उन्होंने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों में दवाइयों और डॉक्टरों की भारी कमी है, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं. इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं लगभग नदारद हैं, और सरकार इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम उठाने में नाकाम रही है.
इसके साथ ही बेरोजगारी का मुद्दा भी चिंता का विषय बना हुआ है. रावत ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार युवाओं को सिर्फ आश्वासन दे रही है, लेकिन वास्तविक रोजगार सृजन की कोई ठोस योजना नहीं बनाई जा रही है.
रावत ने चेतावनी दी कि यदि पौड़ी गढ़वाल की उपेक्षा जारी रही और इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो जनता एक बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी. उनका कहना था कि पौड़ी गढ़वाल की जनता अब और चुप नहीं बैठेगी और सरकार को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा. इस स्थिति में प्रदेश की जनता को जागरूक करने और अपनी आवाज उठाने की आवश्यकता है, ताकि सरकार पर दबाव डाला जा सके और गढ़वाल मंडल के मुद्दों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाया जा सके.
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