सीबीआई (फोटो साभार- IANS)
देहरादून: उत्तराखंड के बैंकिंग सेक्टर की आज एक बड़ी खबर सामने आई है. सीबीआई यानी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने उधम सिंह नगर जिले में हुए बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. कोर्ट ने उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की बाजपुर शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक (Branch Manager) समेत कुल 12 आरोपियों को दोषी करार देते हुए जेल और भारी जुर्माने की सजा सुनाई है.
अदालत का कड़ा रुख, मैनेजर को 4 साल की सजा: देहरादून स्थित विशेष सीबीआई न्यायाधीश की अदालत ने आज यानी 31 मार्च को इस मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए अपना फैसला दिया. कोर्ट ने मुख्य आरोपी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक राम अवतार सिंह दिनकर को भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी पाया. अदालत ने दिनकर को 4 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई और उन पर 50,000 रुपए का व्यक्तिगत जुर्माना भी लगाया है.
11 अन्य दोषियों पर भी शिकंजा: इस घोटाले में केवल बैंक अधिकारी ही शामिल नहीं थे, बल्कि कई निजी व्यक्तियों और बिचौलियों ने भी साठगांठ थी. अदालत ने राम सिंह, हरजीत सिंह, दीवान सिंह, हरदत्त सिंह, जसवीर सिंह, बलकार सिंह, पूरन चंद, दीदार सिंह, महेश कुमार, गुरदीप सिंह और सोना सिंह को भी इस आपराधिक साजिश का हिस्सा माना. इन सभी 11 दोषियों को एक-एक साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई. साथ ही इन सभी दोषियों पर सामूहिक रूप से 3.3 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया.
CBI Court Sentences 12 Accused, Including Former Branch Manager of Uttarakhand Gramin Bank, to Imprisonment with Fine in Bank Fraud Case pic.twitter.com/HVkoQcoAJk
— Central Bureau of Investigation (India) (@CBIHeadquarters) March 31, 2026
रचा गया 3.39 करोड़ रुपए का ‘झोल’: सीबीआई की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, यह पूरा घोटाला साल 2014-15 के दौरान अंजाम दिया गया था. बाजपुर स्थित उत्तराखंड ग्रामीण बैंक की शाखा में उस समय आरएएस दिनकर प्रबंधक के पद पर तैनात थे. आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए एक निजी ट्रैक्टर डीलर, मैसर्स केजीएन ट्रैक्टर्स एंड इक्विपमेंट (M/s KGN Tractors and Equipments) के साथ मिलकर एक गहरी साजिश रची.
जांच में पाई गई ये लापरवाही: बैंक के तय दिशा-निर्देशों और प्रक्रियाओं को दरकिनार कर फर्जी तरीके से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC), फसल ऋण और कृषि सावधि ऋण (Agricultural Term Loans) स्वीकृत किए गए. इतना ही नहीं दस्तावेजों में दिखाया गया कि किसानों ने खेती के लिए ट्रैक्टर और अन्य उपकरण खरीदने के लिए ऋण लिया है.

उत्तराखंड ग्रामीण बैंक (फाइल फोटो- ETV Bharat)
वहीं, मार्जिन मनी के रूप में दिखाकर फसल ऋण के पैसों को सीधे ट्रैक्टर डीलर के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया. जांच में पता चला कि वास्तव में कोई कृषि मशीनरी ही खरीदी नहीं गई थी. यह केवल बैंक से पैसा निकालने का एक जरिया बनाया था. इस पूरी हेराफेरी से बैंक को कुल 3,39,94,657 रुपए (करीब3.40 करोड़) का सीधा वित्तीय नुकसान हुआ.
ये है केस की पूरी टाइमलाइन-
- 12 जून 2018 को उत्तराखंड ग्रामीण बैंक के प्रधान कार्यालय (देहरादून) के महाप्रबंधक ने सीबीआई को एक लिखित शिकायत सौंपी.
- 19 जून 2018 को सीबीआई ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू की.
- 24 दिसंबर 2018 को सीबीआई ने सभी आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की.
- 31 मार्च 2026 को लंबी कानूनी प्रक्रिया और गवाहों के बयानों के आधार पर सीबीआई कोर्ट ने दोषियों को सजा सुनाई.
ये भी पढे़ं-

