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भोपाल AIIMS के डॉक्टर ने पत्नी और बेटी संग दी जान, पुलिस जांच में जुटी


भोपाल एम्स के डॉक्टर ने पत्नी व बेटी के साथ जान दी (प्रतीकात्मक तस्वीर-IANS)

नरसारावपेटा (आंध्र प्रदेश): आंध्र प्रदेश के पलनाडु जिले में एम्स भोपाल में कार्यरत डॉक्टर ने पत्नी व बेटी के साथ जान दे दी. घटना रविवार को सामने आई तब तक मां और बेटी की मौत हो चुकी थी, जबकि डॉक्टर ने सोमवार को दम तोड़ दिया.

पुलिस ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि एनेस्थिसियोलॉजिस्ट डॉ. गोपी की सोमवार सुबह नरसारावपेटा के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज के दौरान मौत हो गई. वहीं रविवार को उनकी पत्नी और छोटी बेटी की भी मौत हो गई थी.

यह घटना रविवार को तब सामने आई जब दंपत्ती ने अपनी तीन साल की बेटी मौनीहा के साथ एनेस्थेटिक इंजेक्शन लगवाकर जान देने की कोशिश की. गोपी की पत्नी शंकरकुमारी (30) और उनकी बेटी की उसी दिन मौत हो गई, जबकि गोपी को बेहोशी की हालत में परिवार के सदस्य अस्पताल ले गए.

पुलिस ने बताया कि डॉक्टरों की कोशिश के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और सोमवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया. उसके बाद उसकी शव को ऑटोप्सी के लिए नरसारावपेटा एरिया हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया है.

नरसारावपेटा टाउन पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने बताया कि नादेंदला मंडल के सथुलुरू के रहने वाले गोपी, एम्स भोपाल में एनेस्थिसियोलॉजिस्ट के तौर पर काम कर रहे थे. उनकी पत्नी, जो मूल रूप से श्री सत्य साईं जिले के धर्मावरम की रहने वाली थीं, उसी इंस्टीट्यूशन में नर्स थीं.

इस दंपती ने अपने परिवारों की सहमति से शादी की थी और कहा जाता है कि वे हाल के महीनों तक एक सामान्य जीवन जी रहे थे. सूत्रों ने बताया कि बेटी मौनीहा की हेल्थ कंडीशन की वजह से दंपती बहुत ज़्यादा मानसिक तनाव में था.

बताया गया कि उसमें मानसिक और शारीरिक विकास के कोई लक्षण नहीं दिखे, जिससे माता-पिता पर बहुत बुरा असर पड़ा. करीब 20 दिन पहले शंकरकुमारी मौनीहा के साथ अपने मायके गई थी. वहीं गोपी दो दिन पहले भोपाल से आया और उन्हें नरसारावपेटा ले आया, जहां वह एक लॉज में ठहरे.

इतना ही नहीं डॉक्टर गोपी ने रविवार सुबह अपनी बहन को वाट्सएप पर तस्वीरें भेजीं, जिससे पता चला कि वे खुद को नींद की दवा का इंजेक्शन लगा रहे थे.

घबराकर परिवार के लोग उनकी लोकेशन ट्रेस करके लॉज पहुंचे, तो तीनों बेहोश मिले. बाद में डॉक्टरों ने मां और बच्चे की मौत की पुष्टि की, जबकि गोपी ने मरने से पहले ज़िंदगी के लिए संघर्ष किया.

पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और हालात की जांच कर रही है जिनकी वजह से यह दुखद स्थिति पैदा हुई. यह घटना लंबे समय से मेडिकल और डेवलपमेंट से जुड़ी मुश्किलों से जूझ रहे परिवारों के लिए भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सपोर्ट की तुरंत ज़रूरत को दिखाती है.

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