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अमेरिका ईरान युद्ध: उत्तराखंड में घर बनाना हुआ मुश्किल, निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों ने बिगाड़ा बजट


युद्ध लाया मुसीबत (ETV Bharat Graphics+AP)

देहरादून से किरनकांत शर्मा की रिपोर्ट: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ साथ घरेलू बाजारों में भी साफ रूप से दिखाई देने लगा है. खासतौर पर निर्माण क्षेत्र इस संकट से बुरी तरह प्रभावित हुआ है. घर बनाने में इस्तेमाल होने वाली लगभग हर प्रमुख सामग्री जैसे सीमेंट, सरिया, ईंट, रेत, बजरी, टाइल्स और अन्य फिटिंग्स की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी से लोग परेशान हो गए हैं.

कुछ लोगों ने घर बनाना शुरू किया है, तो कुछ अब सोच रहे हैं. लेकिन हर चीज पर बढ़ती महंगाई लोगों के रसोई से लेकर मकान के सामान पर दिखने लगी है. ऐसे लाखों लोग हैं, जो अपना घर बनाने का सपना देख रहे हैं या पहले से निर्माण कार्य में लगे हुए हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे माल की लागत में बढ़ोत्तरी, ईंधन की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधाओं ने मिलकर इस महंगाई को और तेज कर दिया है. आइये जानते हैं क्या क्या हुआ है बाजार में.

HOME CONSTRUCTION IN UTTARAKHAND

गृह निर्माण सामग्री के बढ़े दाम (ETV Bharat Graphics)

सरिया और सीमेंट के दामों में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी से निर्माण लागत में भारी इजाफा: आप अगर कुछ भी निर्माण करते हैं, तो उसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है सरिया और सीमेंट. यही दोनों चीजें हाल के दिनों में बेहद महंगे हो गए हैं. युद्ध से पहले जहां सरिया के दाम औसतन 50,000 से 52,000 प्रति टन के बीच थे, वहीं अब यह 60,000 से 65,000 प्रति टन तक पहुंच चुके हैं. ये दाम अलग अलग शहरों के हैं. देहरादून में अभी सरिया के दाम 63,000 टन चल रहे हैं. देहरादून के हर्रावाला स्टेशन के समीप सरिये का कारोबार करने वाले रोबिन अग्रवाल कहते हैं कि-

कुछ स्थानों पर गुणवत्ता और ब्रांड के अनुसार यह कीमत इससे भी ऊपर जा रही है. इसी तरह सीमेंट के दामों में भी लगातार वृद्धि हो रही है. पहले सीमेंट की जो एक बोरी 360 से 380 के बीच मिल जाती थी, वह अब 400 से 410 तक बिक रही है. हालांकि अभी देहरादून में पूरा स्टॉक है, लेकिन नए रेट जल्द लागू हो सकते हैं.
-रोबिन अग्रवाल, सरोया कारोबारी-

रोबिन कहते हैं कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो मुश्किल बढ़ेगी. इस बढ़ोत्तरी के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं. लोहे और कोयले के आयात की लागत में वृद्धि उत्पादन खर्च में इजाफा और परिवहन महंगा होने के कारण कंपनियों ने दाम बढ़ाए हैं. इसका असर ये हो रहा है कि हर इंसान के मकान बनाने की लागत में 15 से 25 प्रतिशत तक का इजाफा होना तय है. ये आम आदमी के लिए एक बड़ा आर्थिक झटका है.

ईंट, रेत और बजरी की कीमतों में उछाल, छोटे शहरों में और ज्यादा असर: सीमेंट और सरिया के अलावा ईंट रेत और बजरी जैसी बुनियादी सामग्रियों के दाम भी तेजी से बढ़े हैं. पहले जहां ईंट 6 से 7 प्रति पीस मिलती थी, अब इसकी कीमत कई जगह पर 8 से 8 रुपए 50 पैसे तक पहुंच रही है. कई इलाकों में उच्च गुणवत्ता वाली ईंट 10 तक बिक रही है.

रेत की कीमतों में भी अचानक बढ़ोत्तरी: रेत पहले 90 से 95 प्रति क्विंटल मिल रही थी. इसी कारोबार से जुड़े गोविन्द सिंह कहते हैं कि हमारे यहां फिर भी बहुत पैदावार है, लेकिन अन्य राज्यों में ये कीमत और अधिक हो जाएगी. रेत दूर से आती है, लेकिन फिर भी ये बात सही है कि महंगाई का असर आम आदमी के सामने घर बनाने में तो पड़ ही रहा है.

टाइल्स, मार्बल और इंटीरियर सामग्री भी हुई महंगी: गैस की कीमतों का असर निर्माण के अंतिम चरण में उपयोग होने वाली टाइल्स, मार्बल, ग्रेनाइट और अन्य इंटीरियर सामग्री में भी दिखाई पड़ रहा है. बाजार में टाइल्स उद्योग में गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है. मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण गैस की कीमतों में उछाल आया है. इसके चलते टाइल्स की कीमतों में करीब 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है. पहले जहां सामान्य टाइल्स 35 से 40 प्रति वर्ग फुट मिलती थीं, अब वही 45 से 50 और उससे भी अधिक पहुंच गई है.

कुछ लोग पुराना माल होने की वजह से वजह से अभी वही रेट लगा रहे हैं, लेकिन नए आने वाले माल की कीमत में इजाफा हो गया है. प्रीमियम और डिजाइनर टाइल्स के दाम इससे भी अधिक बढ़े हैं. इसके अलावा बाथरूम फिटिंग्स, पाइप, वायरिंग, पेंट और अन्य सजावटी सामग्री की कीमतों में भी 4 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. इससे कुल निर्माण लागत और बढ़ गई है.

परिवहन लागत में उछाल ने बढ़ाया बोझ, डीजल महंगा होने से असर गहरा: बाजार पर नजर रखने वाले साहिब सिंह कहते हैं कि-

निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने के पीछे एक बड़ा कारण परिवहन लागत में वृद्धि भी है. डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी के कारण ट्रकों और अन्य वाहनों से सामग्री ढुलाई महंगी हो गई है. उत्तर भारत के कई शहरों जैसे हरिद्वार, देहरादून और पहाड़ी शहर ही नहीं यूपी बिहार जैसे शहरों में भी परिवहन शुल्क में 30 से 50 तक प्रति यूनिट का इजाफा हुआ है. इससे दुकानदारों और ठेकेदारों को अधिक कीमत पर सामग्री खरीदनी पड़ रही है. इसका भार आखिरकार ग्राहकों पर ही पड़ता है. ईंधन की कीमतों में अस्थिरता के चलते आने वाले समय में यह लागत और बढ़ सकती है.
-साहिब सिंह, बाजार विशेषज्ञ-

सप्लाई चेन पर असर, आयातित कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित: साहिब सिंह का कहना है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ा है. कई देशों से आने वाले कच्चे माल जैसे कोयला, पेट्रोलियम उत्पाद और धातुओं की सप्लाई बाधित हुई है. इससे निर्माण सामग्री बनाने वाली कंपनियों को उत्पादन में कठिनाई हो रही है और लागत बढ़ रही है. कई फैक्ट्रियां अपनी पूरी क्षमता पर काम नहीं कर पा रही हैं, जिससे बाजार में उपलब्धता कम हो रही है और कीमतें ऊपर जा रही हैं.

आम आदमी पर सीधा असर, घर बनाने का सपना होता जा रहा महंगा: देहरादून में मकान मकान बनाने की सोच रहे सुभाष रमोला अभी मकान बनाने में जल्दबाजी नहीं करना चाहते हैं. वो अभी युद्ध की वजह से महंगी हुई चीजों को देख कर शांत बैठे हैं. सुभाष सभी चीजें सामान्य होने का इन्तजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि-

जो अपनी बचत और कर्ज के सहारे घर बनाने की योजना बना रहा था, अभी वो टालने की सोच रहा हूं. यह स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई है. देहरादून शहर में जहां पहले एक सामान्य 1000 वर्ग फुट का मकान 15 से 18 लाख में तैयार हो जाता था, अब उसी मकान की लागत 22 से 25 लाख तक पहुंच रही है. इससे कई लोग अपने निर्माण कार्य को बीच में ही रोकने या भविष्य के लिए टालने को मजबूर हो गए हैं.
-सुभाष रमोला, देहरादून निवासी-

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