नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस) कैट के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने रविवार को कहा कि सरकार को कुछ ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल और निर्णायक कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि ऐसी गतिविधियां भारत के खुदरा व्यापार पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर रूप से विकृत कर रही हैं।
भाजपा सांसद ने कुछ विदेशी वित्त पोषित ई-कॉमर्स संस्थाओं द्वारा अपनाई गई अनियंत्रित और अनुचित प्रथाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की, जो भारत के नौ करोड़ से अधिक व्यापारियों के लिए एक असमान खेल का मैदान बना रहे हैं, जो देश की आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ हैं।
उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि शिकारी मूल्य निर्धारण, गहरी छूट, डार्क पैटर्न, मार्केटप्लेस के रूप में प्रच्छन्न इन्वेंट्री-आधारित मॉडल, चुनिंदा विक्रेताओं के लिए अधिमान्य उपचार और डार्क स्टोर्स का तेजी से विस्तार न केवल प्रतिस्पर्धा-विरोधी हैं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के अस्तित्व को भी खतरे में डाल रहे हैं।
खंडेलवाल ने कहा, “इन कंपनियों को इस तरह से काम करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है जो भारत की आर्थिक संप्रभुता को कमजोर करती है और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बाधित करती है। अर्थव्यवस्था के संतुलित और टिकाऊ विकास के लिए ऑफ़लाइन और ऑनलाइन व्यापार के बीच एक समान अवसर आवश्यक है।”
उन्होंने इस तरह की गड़बड़ियों को रोकने और घरेलू व्यापार के हितों की रक्षा के लिए कड़े नियामक ढांचे और मजबूत प्रवर्तन तंत्र के साथ-साथ एक व्यापक राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति को तत्काल अंतिम रूप देने और लागू करने की मांग की।
जन विश्वास विधेयक 2.0 के पारित होने का स्वागत करते हुए खंडेलवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने विश्वास-आधारित शासन और व्यापार करने में आसानी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत किया है।
उन्होंने कहा कि यह प्रगतिशील सुधार देश भर के व्यापारियों और उद्यमियों के बीच विश्वास बढ़ाने में काफी मददगार साबित होगा।
संस्थागत सुधारों की आवश्यकता पर जोर देते हुए, खंडेलवाल ने ‘राष्ट्रीय खुदरा विकास परिषद’ की स्थापना का भी आह्वान किया, जो नीति निर्धारण में व्यापारिक समुदाय को संरचित प्रतिनिधित्व प्रदान करेगी।
व्यापार को प्रभावित करने वाली नीतियां हितधारकों की सक्रिय भागीदारी के साथ बनाई जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, “एक राष्ट्रीय खुदरा विकास परिषद यह सुनिश्चित करेगी कि व्यापारियों की आवाज़ सुनी जाए और नीति ढांचे में एकीकृत किया जाए, जिससे अधिक व्यावहारिक और प्रभावी शासन हो सके।”
–आईएएनएस
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