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CENSUS: कैसे होगी लिव-इन कपल्स की गणना, क्या माने जाएंगे शादीशुदा? किराएदारों के लिए क्या हैं प्रावधान, जानिए


उत्तराखंड में जनगणना की तैयारी (फोटो- ETV Bharat)

देहरादून: उत्तराखंड में जनगणना के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य 25 अप्रैल से शुरू होने जा रहा है. इसके दृष्टिगत 10 अप्रैल से स्वगणना की प्रक्रिया भी शुरू हो रही है. ऐसे में जनता के बीच जनगणना के पहले चरण की होने जा रहे मकान सूचीकरण एवं मकान की गणना के कार्य को लेकर तमाम सवाल बने हुए हैं. जिसमें मुख्य रूप से लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को जनगणना के दौरान एक फैमिली के रूप में शामिल किया जाना है.

ऐसे में उनकी गणना कैसे की जाएगी? इसके अलावा उत्तराखंड में बड़ी संख्या में लोग किराए के मकानों में भी रहते हैं, उसको लेकर के जनगणना में क्या कुछ प्रावधान किए हैं और जनगणना के दौरान वो अपनी किस तरह से भूमिका निभा सकते हैं? इन्हीं तमाम सवालों के जवाब जनगणना कार्य एवं नागरिक पंजीकरण निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने दी.

बता दें कि, जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत उत्तराखंड में 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य किया जाएगा. उससे करीब 15 दिन पहले यानी 10 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 तक जनता को स्वगणना का विकल्प दिया गया है. हालांकि, पहली बार जनता को स्वगणना का विकल्प दिया गया है. साथ ही पहली बार डिजिटल जनगणना होने जा रही है.

वहीं, ईटीवी भारत से बातचीत में उत्तराखंड के जनगणना कार्य एवं नागरिक पंजीकरण निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि स्वगणना पूरी तरह से जनता आधारित है, जिसका ज्यादा से ज्यादा प्रचार-प्रसार किया जाना है. ताकि लोग स्वगणना के प्रति प्रेरित हो. साथ ही कहा कि 25 अप्रैल से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना शुरू हो जाएगी. जिसके दृष्टिगत फरवरी महीने से ही अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ट्रेनिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी.

Iva Ashish Srivastava

इवा आशीष श्रीवास्तव (फोटो- ETV Bharat)

जनगणना से जुड़े अधिकारी-कर्मचारियों को हो रही ट्रेनिंग: इसके तहत सबसे पहले चार्ज ऑफिसर्स, मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स की ट्रेनिंग की जा चुकी है. जबकि, 6 अप्रैल से प्रगणक और परीक्षक की ट्रेनिंग शुरू हो गई है. प्रदेश भर में 650 बैच की ट्रेनिंग कराई जानी है, जिसमें से कई बैच की ट्रेनिंग हो चुकी है.

साथ ही बताया कि 30 हजार प्रगणक और परीक्षक की ट्रेनिंग प्रक्रिया 6 अप्रैल से शुरू हुई है और 22 अप्रैल तक संपन्न कर लिया जाएगा. वर्तमान समय में कर्मचारियों के ट्रेनिंग अटेंडेंस पर नजर रखी जा रही है साथ ही उनके लिए तमाम व्यवस्थाएं भी की गई है कि जो ट्रेनिंग में आ रहे हैं, उनको किसी तरह की कोई दिक्कत ना हो.

उत्तराखंड में लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे 76 कपल्स: उत्तराखंड में साल 2025 में यूसीसी यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड (समान नागरिक संहिता) लागू होने के बाद से अभी तक लिव इन रिलेशनशिप में 76 रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. यानी ये 76 कपल्स लीगली तौर पर प्रदेश में लिव इन रिलेशन में रह रहे हैं. ऐसे में स्वगणना के दौरान इन सभी कपल्स के लिए क्या विकल्प होंगे? इसके सवाल पर इवा आशीष श्रीवास्तव ने भी जवाब दिया.

CENSUS IN UTTARAKHAND

लिव इन कपल्स के लिए विकल्प क्या होंगे? (फोटो- ETV Bharat GFX)

लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल खुद के घोषणा से माने जाएंगे विवाहित: लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल्स खुद को जनगणना में विवाहित दर्ज करा सकेंगे. अगर कपल अपने रिश्ते को स्थिर मानते हैं या भविष्य में शादी करने की योजना बना रहे हैं तो उन्हें विवाहित श्रेणी में गिना जाएगा. यानी लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले कपल्स को विवाहित माना जाएगा.

कपल्स को अगर लगता है कि वो भविष्य में शादी करने जा रहे हैं या फिर उनके रिलेशनशिप लंबे समय तक चलने वाला है तो वो विवाहित का विकल्प चुन सकते हैं. ये सुविधा कपल की स्वयं की घोषणा पर आधारित होगा. चाहे व्यक्ति खुद ऑनलाइन जानकारी भर रहा हो या फिर 25 अप्रैल से शुरू होने जा रहे मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान जब एन्यूमरेटर घर आकर डेटा कलेक्ट कर रहा हो, दोनों ही स्थितियों में कपल की खुद की घोषणा को ही आधार माना जाएगा. ऐसे में अगर वो कपल अपने रिश्ते को स्थिर मानते हैं, तो उन्हें विवाहित श्रेणी में गिना जाएगा.“- इवा आशीष श्रीवास्तव, निदेशक, जनगणना कार्य एवं नागरिक पंजीकरण, उत्तराखंड

जनसंख्या की गणना के दौरान हेड ऑफ हाउस होल्ड से बताना होगा रिलेशनशिप: इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के दौरान हेड ऑफ हाउस होल्ड का ऑप्शन नहीं होता है, लेकिन फरवरी महीने 2027 में जनसंख्या की गणना की जाएगी. उस दौरान हेड ऑफ हाउस होल्ड से रिलेशनशिप बताना होता है. उस दौरान अदर्स का ऑप्शन भी इनके पास मौजूद होगा.

कपल के खुद की घोषणा को ही माना जाएगा आधार: ऐसे में लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे कपल्स अपने आप को विवाहित बताना चाहते हैं तो वो बता सकते हैं, नहीं तो अदर्स का ऑप्शन भी मौजूद होगा. जिस विकल्प को वो चुन सकते हैं. कुल मिलाकर कपल के खुद की घोषणा को ही आधार माना जाएगा.

किराएदारों की गणना कैसे होगी? उत्तराखंड में बड़ी संख्या में लोग किराए पर मकान लेकर रहते हैं. इस में सिचुएशन ये भी रहता है कि दो या तीन मंजिला मकान बने हुए हैं. जिसमें मकान मालिक किसी एक फ्लोर पर रहता है. बाकी फ्लोर पर किराएदार रहते हैं. ऐसी स्थिति में जनगणना कैसे होगा? इसके सवाल पर जनगणना निदेशालय के निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने अपना जवाब गिया.

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किराएदारों की गणना कैसे होगी? (फोटो- ETV Bharat GFX)

जनगणना के दौरान झूठी जानकारी देने पर जुर्माने के साथ हो सकती है जेल: जनगणना के दौरान लोगों की ओर से झूठी जानकारी दिए जाने पर कार्रवाई का भी प्रावधान किया गया है. इवा श्रीवास्तव ने कहा कि जनगणना के दौरान अगर ऐसा कोई चीज संज्ञान में आता है कि किसी ने झूठी जानकारी दी है तो स्थिति में 1000 रुपए का जुर्माना लगाने के साथ ही कारावास का भी प्रावधान किया गया है.

जनगणना की सारी जानकारियां रखी जाती हैं गुप्त: लिहाजा, जनता को जनगणना के दौरान कोई झूठी जानकारी नहीं देना चाहिए. इसमें झूठी जानकारी देने का कोई फायदा भी नहीं होगा. क्योंकि, जनगणना की सारी जानकारियां गुप्त रखी जाती हैं. इसके साथ ही जनगणना के दौरान झूठी जानकारी देने से उन्हें कोई लाभ नहीं मिलने वाला है.

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जनगणना कार्य निदेशालय उत्तराखंड (फोटो- ETV Bharat)

क्यूआर कोड से जान सकते हैं जनगणना कर्मचारी है या नहीं? जनगणना के दौरान कर्मचारियों को दिक्कत ना हो, इसके लिए भी तमाम प्रावधान किए गए हैं. जिसके तहत सभी एन्यूमरेटरर्स को सरकार की ओर से आईडी कार्ड जारी किया जाएगा. जिसमें क्यूआर कोड की भी सुविधा दी गई है. ऐसे में कोई भी व्यक्ति उस क्यूआर कोड को स्कैन कर संबंधित व्यक्ति जनगणना कर्मचारी है या नहीं? उसकी जानकारी ले सकता है.

जनगणना के दौरान नहीं मांगी जाती ओटीपी: इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि मुख्यतः प्रगणक उसी क्षेत्र के होते हैं, जो क्षेत्र उनको अलॉट किया जाता है. ताकि, जनगणना के दौरान इस तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े. साथ ही बताया कि जनगणना के दौरान किसी भी व्यक्ति से कोई भी ओटीपी नहीं मांगी जाएगी. बल्कि ये जरूर है कि स्वगणना के दौरान मिली यूनिक आईडी को प्रगणक आपसे मांगेगा.

जनगणना के दौरान 30 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारियों की लगाई जाएगी ड्यूटी: जनगणना के दौरान बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती की जाती है, जो विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती होती है. इसके सवाल पर निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने कहा कि कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन जनगणना के दौरान 30 हजार से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है.

ऐसे में कुछ चुनौतियां देखने को मिलती है कि तमाम लोगों की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी होती हैं, जिससे वो जनगणना में अपनी ड्यूटी नहीं देना चाहते हैं. ऐसे में जो सही मामले होते हैं, उसको देखा जाता है, लेकिन जो सही नहीं होते हैं, उस दौरान चुनाव की तरह ही जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती है, उन्हें ही ड्यूटी देनी पड़ती है.

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