उत्तरकाशी: वन विभाग की ओर से छह माह के लिए विधिविधान के साथ गंगोत्री नेशनल पार्क के गेट पर्यटकों के लिए खोल दिए गए है. पर्यटक अब नेलांग और गरतांगली सहित गौमुख तपोवन ट्रेक केदारताल ट्रेक के साथ ही नेलांग घाटी का दिदार कर सकते हैं. इस पार्क के तहत गंगोत्री गलेशियर में विश्व की कई उंची चोटियां और भारत-चीन सीमा का बड़ा क्षेत्र आता है.
गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक हरीश नेगी ने बुधवार को विधिवत पूजा पाठ के बाद पहले गोमुख ट्रेक के कनखू बैरियर के गेट को खोला. उसके बाद नेलांग घाटी और गरतांग गली के गेट खोले गए. वहीं अब पर्यटक छोटे लद्दाख कहे जाने वाली नेलांग और जादूंग घाटी सहित भारत-तिब्बत व्यापार और इंजिनियरिंग के नायाब नमूने गरतांगगली की सैर कर पाएंगे. पार्क के उपनिदेशक हरीश नेगी ने बताया कि इन दोनों स्थानों के लिए एक अप्रैल से अनुमति पर्यटकों को देनी शुरू कर दी गई है.
पार्क क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थल: गरतांगगली भारत-तिब्बत के बीच व्यापारिक रिश्तों की गवाह गरतांगगली को भारत-चीन युद्ध 1962 के बाद सुरक्षा कारणों के चलते बंद कर दिया गया. वर्ष 2021 में सीढ़ीनुमा रास्ते का जीणोर्द्धार कर इसे दोबारा खोला गया. तब से यह पर्यटकों की पहली पसंद बना हुआ है. पर्यटक यहां स्काई वाक जैसा अनुभव लेने आते हैं.
गंगोत्री नेशनल पार्क के उपनिदेशक हरीश नेगी ने खोला गेट. (ETV Bharat)
गोमुख तपोवन ट्रेक: गंगोत्री नेशनल पार्क क्षेत्र में गोमुख तपोवन प्रमुख ट्रेक में से एक है. करीब 18 से 22 किमी पैदल दूरी वाले इस ट्रेक पर पर्यटक को ग्लेशियर के ऊपर से आवाजाही का भी अनुभव मिलता है. इस ट्रेक पर गंगा नदी का उद्गम गोमुख स्थित है, जहां स्नान और पूजा आचमन की मान्यता है. इस ट्रेक पर प्रतिदिन 150 पर्यटक और ट्रेकरों को ही जाने की अनुमति है.
नेलांग घाटी: चीन सीमा से लगी नेलांग घाटी भौगोलिक परिस्थितियों में लद्दाख व स्फीति से मिलती जुलती है. ट्रांस हिमालयी की इस घाटी में ऊंचे-ऊंचे पहाड़ तो है, लेकिन उन पर वानस्पतिक आवरण की कमी है. इसे उत्तराखंड का लद्दाख या छोटा लद्दाख के नाम से भी जाना जाता है. वर्तमान समय में बाइक एक्सपीडिशन के लिए इसी घाटी ने अपनी अलग पहचान बनाई है.
केदारताल ट्रेक: गंगोत्री से शुरू होकर केदारताल झील तक जाने वाला एक चुनौतीपूर्ण और खूबसूरत ट्रेक है, जो समुद्र तल से लगभग 4,750 मीटर 15,584 फीट की ऊंचाई पर स्थित है. पर्यटक व ट्रेकर इस ट्रेक रूट पर गंगोत्री से ट्रेकिंग की शुरूआत कर भोजखरक और केदारखरक होते हुए केदारताल पहुंचते हैं. बर्फ से ढ़की चोटियों के बीच जाने वाला यहा ट्रेक पर्यटकों को रोमांच का अनुभव कराता है.
कालिंदीखाल ट्रेक: यह ट्रेक गढ़वाल हिमालय में गंगोत्री से बदरीनाथ तक जाने वाला एक चुनौतीपूर्ण ट्रेकिंग रूट है, जिसमें पर्यटक और ट्रेकरों को 5,950 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कालिंदी खाल दर्रे को पार करना होता है. यह ट्रेक गंगोत्री से होकर गुजरता है. यह रूट दुनिया के सबसे कठिन ट्रेक रूट की सूची में गिना जाता है.
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