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उत्तराखंड अभियोजन निदेशालय (ETV Bharat)
देहरादून: भारत सरकार ने दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC), 1973 को जगह पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 को लागू कर दिया है. इस बीएनएसएस की धारा 20 में प्रावधान किया गया है कि राज्यों को अभियोजन निदेशालय के गठन का करना होगा. जिसको देखते हुए उत्तराखंड गृह विभाग की ओर से बुधवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान अभियोजन निदेशालय के गठन का प्रस्ताव रखा गया. जिस पर मंत्रिमंडल ने सहमति जाता दी है. ऐसे में देहरादून में एक राज्यस्तरीय अभियोजन निदेशालय का गठन करने के साथ ही जिला स्तरीय निदेशालय का भी गठन किया जाएगा.
जानकारी देते हुए गृह सचिव शैलेश बगौली ने कहा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता- 2023 की धारा 20 में ये प्रावधान किया गया है कि एक अभियोजन निदेशालय की स्थापना की जाएगी. जिसको देखते हुए मंत्रिमंडल ने देहरादून में राज्य अभियोजन निदेशालय खोलने को मंजूरी दे दी है. जिसमें एक अभियोजन निदेशक होंगे. उनके सहयोग के लिए उप निदेशक और सहायक निदेशक भी हो सकते हैं. इसी तरह जिला स्तर पर भी जिला स्तरीय निदेशालय बनाया जाएगा. जिसमें डिप्टी डायरेक्टर होंगे.
उत्तराखंड अभियोजन निदेशालय (ETV Bharat)
गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया अभियोजन निदेशक के लिए वही पात्र होगा जो 15 साल तक वकील या फिर सेशन न्यायधीश रहा है. ऐसे में अभियोजन निदेशक के चयन के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की जाएगी, जो अभियोजन निदेशक का चयन करेगी. इसी तरह जिलास्तरीय निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर वही अधिकारी होंगे जिन्होंने अभियोजन विभाग में 15 साल की सेवा पूरी कर ली होगी. अभियोजन निदेशालय का गठन होने के बाद न सिर्फ न्यायायिक प्रक्रिया आसान होगी बल्कि मामलों का निस्तारण भी तेजी से हो सकेगा.
गृह सचिव शैलेश बगौली ने बताया इस व्यवस्था के तहत 7 साल से कम कारावास वाली धाराओं से संबंधित मामलों को जिलास्तरीय निदेशालय में अपील किया जा सकेगा. 7 साल से ऊपर कारावास वाली धाराओं से संबंधित मामलों को राज्य अभियोजन निदेशालय में अपील अभियोजन निदेशक के स्तर से लिया जाएगा. बीएनएसएस, 2023 का मुख्य उद्देश्य यही है कि आपराधिक न्याय प्रक्रिया को आधुनिक, तेज, पारदर्शी और तकनीक- आधारित बनाया जा सके. जिससे कोई भी मामला लंबे समय तक पेंडिंग न रहें. सबको जल्द से जल्द न्याय मिल सकें.

